Sunday, June 24, 2012

अविस्मरणीय सफ़र हिमाचल की वादियों में ....

कुल्लू मनाली और हनीमून का सम्बन्ध बहुत पुराना है ,हमेशा से सुनते आये थे शादी के बाद हनीमून के लिए  कुल्लू मनाली  लोग जाते हैं। सोचा तो मैंने भी था , पर हो न सका.......
आखिर शादी के 22 साल बाद ही सही हमने भी कुल्लू मनाली की ये यात्रा कर ही डाली ,रोमांटिक न होकर थोडा रोमांचक थी । ये सफ़र  इंग्लिश और हिन्दी  दोनों वाला ही था और सचमुच कभी न भूलने वाला ।
शादी की 22वी सालगिरह के दिन ही प्लान बना ,ईश्वर  की मर्जी समझ के निकल पड़े अपने चार पहिये वाहन से ।
पहला रोमांच शुरू हुआ पीछे के दोनों टायर पंचर होने से ,मगर किस्मत अच्छी थी कि मकैनिक भी पास ही मिल गया ।गारंटी देने के साथ ही उसने आत्मविश्वास जगाया कि' कोई प्रॉब्लम होने से वापस फ्री में  नया बदल देंगे ।"उसे भी आत्मविश्वाश था की हम फिर नहीं आने वाले।
अगला रोमांच फिर लुधियाना के आसपास इंतज़ार कर रहा था ...जो दो टायर रिपैर  हुए थे उनमे से एक फट गया ......चिलचिलाती धूप थी पर किस्मत ने फिर साथ दिया । मकैनिक की शॉप तो थी पर वो सो रहा था ....

डरते हुए उसे जगाया । उसने पहले पूछा ,"कहाँ से आ रहे हो ?" जब बताया की दिल्ली तो कार का नंबर पलते देख के बोला, आज कपूरथला की बहुत गाड़ियाँ मेरे पास आई " हम थोडा डर  भी गए  कहीं कोई फिर मुसीबत न हो क्योंकि हमारी कार  का पंजीकरण  कपूरथला का था ....खैर हमे उसकी रामकहानी सुनना ही था ,नींद से जगा जो था ।

अगले दिन कपूरथला पहुँच कर हमने अपनी कार की जांच करायी ,फिर दूस्रे  दिन मंडी  को निकल पड़े सोचा था चिन्तपुरनी माता का दर्शन करके निकल जायेंगे ,पर जब तक बुलावा न हो , नहीं सभव होता दर्शन ।लम्बी  लाइन थी, शाम तक मनाली पहुंचना जो था।.....अब फिर एक रोमांच सामने मिला गलती से नेशनल हाइवे की जगह हम ग्रामीण हाइवे पर पहुच गए .......कंकरीली सड़क और काफी दूर तक तकरीबन 15 किलोमीटर ...ये था इंग्लिश का सफ़र (suffer ).......वहीँ एक साइन  बोर्ड भी था "unforgettable Himachal " जैसे हमारा मज़ाक बना रहा हो । हरी भरी बर्फीली वादियों का दृश्य लुप्त हो गया था मन से।मंडी से निकले मनाली पहुंचे |अगला सफ़र रोहतांग का था ,सुबह 4 बजे निकले ,सुंदर सुहाने दृश्यों से गुजरते जा रहे थे ,पर रोमांच की कमी नहीं थी ......बर्फीली वादियों का रोमांच था ही ,पर ट्राफिक जाम का रोमांच भी था 1-2 घंटे का ......कभी नवविवाहित जोड़ों को देखती थी जहाँ उत्साह बढ़ रहा था , तो कभी खुद को जहाँ शायद bloodpressure  बढ़ रहा था ऊंचाई की वजह से...किसी  तरह ये यात्रा भी संपन्न हुई ।
अब मणिकरण के तरफ जाना था सुबह फिर निकले , 10:30 पहुँच गए थे सोचा अब शाम को 6 बजे तक  चंडीगढ़ और देर रात 11 बजे तक दिल्ली तो पहुच ही जायेंगे .......पर 6 बजे तक हम फिर longest  ट्राफिक जाम का  आनंद ले रहे थे .....वजह थी रोड रेपैरिंग ......शाम को किसी तरह जाम के चगुल से बाहर निकले ....
अगले दिन फिर अपने आशियाने मैं ही सुकून मिला।....
इस तरह कुल्लू मनाली की यात्रा संपन्न हो गयी।......




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